

Stone Age / Shubhalaxmi Lamsal
I live the Stone Age and seek the fire for living by striking the pair of palaeoliths. I get cactus to bloom, by carving my existence...


शोकगीत का पोस्टमार्टम / निमेष निखिल
भगाना है किरनोँ से मार-मार कर कमरे में बचे हुवा अँधियारे को । भूख झाँक रही है बेशर्म नरदौआ में से रोग रो रहा है आँखोँ के सामने खदेडना है...


एक टुकड़ा बादल और मेरे सपने / कृष्ण पाख्रिन
जब देखता हूँ मैं तुम्हें आकाश की तरह नीचे आ कर झुकी हुई होती हो पहाड़ी के माथे पर, और बिखरी हुई होती हो क्षितिज के ऊपर, मानो आकाश में कहीं...


عبرت / سیما آبھاس
!اے زندگی آیت کے طرح بھول گیا ہوں میں خود کا نام اور بھول گیا ہوں اپنا لہو کا رنگ بھی. کبوتروں کی طرح پتھتہروں کو نگل کر آ پہنچا ہوں...


काठमान्डू की धूप / अभि सुवेदी
काठमान्डू अपने अनेक धूप और अनेक मूहँ से बोलता है। पथ्थर के वाणी पे तरासा हुवा मन से काठमान्डू अपना प्राचीन मूहँ खोल सैलानियोँ से...


घूमनेवाली कुर्सी पे एक अंधा / भूपी शेरचन
भर दिन खुश्क बाँस की तरह खुद का खोखले वजुद पे उँघकर, पछता कर भर दिन बीमार चकोर की तरह खुद के सीने पे खुद ही चोंच मारमार कर, जख्मों को...
डुबेर यो संसार तलाउमा / सुमन पोखरेल
डुबेर यो संसार तलाउमा पुरिएको छु स्वमोहको लेउमा कसरी भनूँ म भक्त हुँ तेरो मेरो भगवान, मेरो ईश्वर ! न छ पौरख केही मेरो वाहुको न अर्थ...
मैले याद गर्दा कतै / सुमन पोखरेल
मैले याद गर्दा कतै बिझाउँछ भने मेरो सम्झनाले तिमीलाई दुखाउँछ भने बाचा भो मेरो तिमीलाई सम्झिन्नँ कहिल्यै म सम्झिन्नँ अबदेखि तिमीलाई म...


