

माँ का ख्वाब \ गोपालप्रसाद रिमाल
माँ, वह आएगा भी ? "हाँ, बेटा, वह आएगा । वह सुबह का सूरज की तरह रोशनी बिखेरते हुए आएगा । उसकी कमर पे शबनम-सा जगमगाता हुआ तुम एक हथियार...


लेडी लेजरस \ सिल्भिया प्लाथ
मैले फेरि यो गरिसिध्याएकी छु।हरेक दश वर्षमा एकपल्ट यस्तो गर्ने गरेकी छु मैले। एक किसिमको डुलुवा जादू, मेरो छाला नाजी बत्तीको छाया जत्तिकै...


मैले थाह नपाएका मलाई मनपर्ने चिजहरू \ नाजिम हिकमत
आज उन्नाइस सय बैसठ्ठी मार्च अठ्ठाइस प्राग-बर्लिन रेलको झ्यालमा बसेर हेरिरहेछु म। साँझ ढल्दैछ। हुस्सुले भिजेको फाँटमा कुनै थकित चरो जसरी...
बिदा होते हुए
सारी खिड्कीयाँ देख रही हैँ जैसा भी लग ही रहा था सारे दिवारें सुन रहे हैं जैसा भी लग ही रहा था उस वक्त वे सडके और फुटपाथ बोल रहे हैँ जेसा...


شاعرنۂ بنایا ہوتا / سُمن پوکھريل
ہمارے عشق کو رلّگي سا خبر نۂ بنایا ہوتا اے سنگ رل، تونے محبّت کوزھر نۂ بنایا ہوتا خنضر- سیاھہ – شب کیسکیس کو ماد لیتا کیا پتا آنشوعوں نے...
और भी हरी हुई थी / सुमन पोखरेल
दिल मे तब भी तेरी ही मुहब्बत भरी हुई थी तेरे मिलने से दाग-ए-दिल और भी हरी हुई थी उन से मिल के लौट आया मैं जो घर अपना कमरे में...
कहाँ जा रहे हो, कहाँ जा रहे हो ? / सुमन पोखरेल
महफिलों में जो मेरे ही गजल गा रहे हो यकीन हुवा के खतुत मेरे पा रहे हो मैं हूँ तंग किस्मत, या तेरी बदनसिबी है मुझे आज ही है जाना, तुम कल आ...
र मात्र सास आयो / सुमन पोखरेल
आफ्नै कोठाबाट, यो कस्तो बतास आयो चुल्ठो खोल्यौ कि तिमीले, हावामा सुवास आयो रात अँधेरी थियो, तर म बेग्लै देख्छु घुम्टो खोल्यौ कि कसो, यो...


